सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्प सीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में जिला सीधी के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज जिला विकास अभियान का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री अमरशाह अगरिया तथा उनकी पूरी जिला टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा एवं कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, नशामुक्त, आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना तथा फाउंडेशन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाना रहा। कार्यक्रम में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 🌻समाज को संगठित करने पर विशेष जोर🌻 बैठक में सभी कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे प्रत्येक गांव में जाकर अधिक से अधिक परिवारों को फाउंडेशन से जोड़ें तथा समाज क...
💥 अगरिया जनजाति मे धुर्वे गोत्र, परम्परा, इतिहास💥 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌴🌴🌴🌴 अगरिया जनजाति में धुर्वे (धुर्वा/धुर्वे) गोत्र एक महत्वपूर्ण गोत्र माना जाता है। हालांकि अगरिया जनजाति के सभी गोत्रों का लिखित इतिहास बहुत कम उपलब्ध है और अधिकांश जानकारी लोकपरंपराओं, मौखिक इतिहास तथा मध्य भारत की आदिवासी सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। इसलिए धुर्वे गोत्र के संबंध में उपलब्ध जानकारी को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकविश्वासों के आधार पर समझना चाहिए। 👉 धुर्वे गोत्र का परिचय🌱 धुर्वे गोत्र मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ आदिवासी समुदायों में पाया जाता है। अगरिया जनजाति में भी धुर्वे गोत्र के परिवार मिलते हैं। 👉 "धुर्वे" शब्द की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न मत हैं—💥 💥 ध्रुव (स्थिरता) से संबंध :– कुछ विद्वान धुर्वे शब्द को संस्कृत के "ध्रुव" शब्द से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ अटल, स्थिर या दृढ़ होता है। 🌴 वनस्पति या प्राकृतिक प्रतीक से संबंध :– आदिवासी परंपराओं में कई गोत्र किसी वृक्ष, पशु, पक्षी या प्राकृतिक तत्व प...