सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन सिंगरौली (मध्यप्रदेश)। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के तत्वावधान में 06 जुलाई 2026 को जिला सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में "अगरिया समाज जिला विकास अभियान" का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार अगरिया एवं उनकी पूरी टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, मातृशक्तियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं नशामुक्त बनाने के साथ-साथ समाज की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का संरक्षण करना था। बैठक में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 📌 समाज के विकास के लिए लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखि...
🐍 अगरिया जनजाति का नागवंशी (नाग) गोत्र : इतिहास, परंपरा, टोटम और सामाजिक महत्व💥 👇 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 ❤️💥💥🌱💥 अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह-प्रगलक (Iron Smelter) आदिम जनजातियों में से एक है, जिसने सदियों तक प्राकृतिक लौह अयस्क से लोहा गलाकर कृषि, शिकार और दैनिक जीवन के लिए आवश्यक औजारों का निर्माण किया। इस समाज की पहचान केवल उसकी लौह-कला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी समृद्ध गोत्र व्यवस्था, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक अनुशासन भी इसकी विशिष्ट पहचान हैं। अगरिया समाज में अनेक प्राकृतिक एवं टोटम आधारित गोत्र पाए जाते हैं। इन्हीं में नागवंशी (नाग) गोत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण, प्राचीन और सम्मानित गोत्र माना जाता है। यह गोत्र नाग (सर्प) को अपने कुल-प्रतीक (टोटम) के रूप में मानता है और प्रकृति संरक्षण की आदिवासी परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। 👉 नागवंशी गोत्र का अर्थ:- "नागवंशी" शब्द दो भागों से मिलकर बना है— •नाग अर्थात सर्प। •वंशी अर्थात वंश या कुल से संबंधित। आदिवासी परंपराओं में इसका अर्थ यह नहीं होता क...