अगरिया समाज का राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 संपन्न कोतमा अनूपपुर म.प्र सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सीधी मध्यप्रदेश के ग्राम सोनगढ़ मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान संपन्न हुआ दिनांक 31/03/2025 को ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन

लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का प्रमुख कार्यक्रम अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम जो फाउंडेशन से जुड़े लगभग सभी राज्यों के जिलों मे प्रति वर्ष माह मार्च - अप्रैल मे संपन्न होता है ll जहाँ लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की ओर से प्रत्येक जिले के नोडल कार्यकर्ता अधिकारी नियुक्त किये जाते है जो जिलों मे उपस्थित होकर कार्यक्रम को सम्पन्न कराते है ll नियुक्त नोडल द्वारा फाउंडेशन के एजेंडा को विश्लेषण करते हुए उपस्थित सामाजिक स्वजातीय बंधुओ को विधिवत समझाया जाता है और कार्यक्रम के अंत मे उपस्थित स्वजातीय बंधुओ को शपथ ग्रहण करवाया जाता है ll  अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का उद्देश्य अगरिया जनजाति जो की आज के इस आधुनिक परिवेश मे भी शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी, सामाजिक रहन सहन मे पिछड़ी जनजाति है जिसके स्तर मे सामाजिक जागरूकता के लिए इस कार्यक्रम को आयोजित कराया जाता है जिससे इस समाज मे जागरूकता आ सके और समाज सशक्त हो सके ll ज़िला सीधी के ग्राम सोनगढ़ मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन  दिनांक 31/03/2025 को हुआ ll जहाँ ज़िला सीधी के लिए नियुक्त नोडल...

अगरिया समाज का राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 संपन्न कोतमा अनूपपुर म.प्र

अगरिया जनजाति समाज का राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 दिनांक 24/09/2023 को जिला अनूपपुर के कोतमा (कुशा भाऊ ठाकरे मंगल भवन)मे लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन मे नेतृत्व मे संपन्न हुआ ll जहाँ अगरिया अगरिया समाज के राष्ट्रीय स्तर से कई राज्यों से तथा जिलों से कार्यकर्त्ता सम्मिलित हुए ll कार्यक्रम मे भागीदारी सुनिश्चित करने वाले राज्यों मे झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ रहे हैं जहाँ से कार्यक्रम मे सम्मिलित होने वाले जिलों के कार्यकर्त्ताओ मे झारखंड के गढ़वा से, सोनभद्र उत्तरप्रदेश से, कबीरधाम, कोरिया, रायगढ़ छत्तीशगढ़ से एवं मध्यप्रदेश से अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी सिंगरौली, शहडोल जिलों के कार्यकर्त्ता उपस्थित हुए ll संस्था के मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ अगरिया कोतमा ने बताया की अगरिया समाज राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 का उद्देश्य अगरिया जनजाति को संरक्षित करना, अगरिया जनजाति के संस्कृति को संरक्षित करना, अगरिया जनजाति के इतिहास जो की एक वैज्ञानिक इतिहास हैं जिसने इस दुनिया मे सर्वप्रथम लौह अयस्क (लौह पत्थर)की पहचान किया तथा परंपरागत तरीके से अपने संस्कृति कोटि भट्ठी, चेपूआ, के माध्यम से लोहा बनाने की संस्कृति को उजागर करना llअगरिया जनजाति की पहचान अस्तित्व को उजागर करना, तथा सम्पूर्ण भारत अंतर्गत अगरिया जनजाति को संगठित करना एवं समाज मे शिक्षा के प्रति जागरूकता लाना, शिक्षा की प्रमुखता को समझाना, शिक्षा के क्षेत्र मे समाज के बच्चों द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने पर बच्चों एवं मा बाप को सम्मानित करना ll  समाज के प्रतिभावान कलाकारों को पहचान देना एवं सम्पूर्ण अगरिया जनजाति के उत्थान विकास के लिए कार्य करना रहा हैं ll
कार्यक्रम की शुरुआत अगरिया जनजाति के इष्ट देव लोहासुर एवं संस्कृति कोठी भट्ठी के पूजन के साथ किया गया ll इसके पश्चात राज्यों जिलों से आये समस्त पदाधिकारियों, महिलाओ, कार्यकर्ताओ के फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया ll कार्यक्रम के दौरान समाज की बच्चियों द्वारा स्वागत नृत्य एवं आदिवासी नृत्य एवं अगरिया जनजाति के गीत पर सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किये ll एवं आये राज्यों जिलों से कार्यकर्ताओ के उद्बोधन विचार लिए गए ll तथा फाउंडेशन के प्रति लोगो की मंशा एवं समाज के उत्थान विकास मे विचार लिए गएll
कार्यक्रम के दौरान सत्र 2022-23 मे फाउंडेशन की ओर से बेहतर, निष्ठा पूर्वक कार्य करने वाले कार्यकर्ताओ को फाउंडेशन की ओर से सम्मानित किया गया ll एवं ऐसे जिलों जिलाध्यक्ष को भी सम्मानित किया गया जो जिलों मे फाउंडेशन की गतिविधि को अच्छे से पूरे साल संचालित किये ll तथा मार्च 2023 मे संगठन की ओर से चलाये गए अगरिया जोड़ो अभियान मे सभी जिलों के लिए नियुक्त नोडल जिन्होंने ने अन्य जिलों मे जाकर अपने दायित्व का निर्वाहन किये सम्मानित किया गया ll विवरण निम्नानुसार हैं l-
:-बेस्ट जिलाध्यक्ष का सम्मान 2022-23-:
1- श्री सुकुल नागवंशी कोरिया छत्तीसगढ़
2- श्री राजकुमार अगरिया सिंगरौली मध्यप्रदेश
उपरोक्त दोनों जिलों के जिलाध्यक्ष को फाउंडेशन की ओर से प्रोत्साहन प्रमाण पत्र, मैडल, डायरी पेन एवं सॉल तथा साफा से सम्मानित किया गया ll
:- बेस्ट कार्यकर्त्ता सम्मान 2022-23-:
1- श्री अन्नू धुर्वे कबीरधाम छत्तीसगढ़
2- श्री सुखित लाल अगरिया कोरिया छत्तीशगढ़
उपरोक्त दोनों कार्यकर्त्ताओ ने पूरे सॉल पूरे लगन और निष्ठा से फाउंडेशन के कार्यों मे भागीदारी निभाए ll दोनों कार्यकर्ताओ को फाउंडेशन प्रोत्साहन प्रमाण पत्र, मैडल, डायरी पेन, एवं सॉल,साफा से सम्मानित किया गया ll
-:जिलाध्यक्ष एवं नोडल सम्मान एवं अन्य मुख्य कार्यकर्ताओ का सम्मान हुआ :-
इसके पश्चात सभी नोडल का भी सम्मान डायरी पेन एवं मैडल के साथ किया गयाll नोडल सम्मान प्राप्त करने वाले कार्यकर्ताओ मे - मयाराम अगरिया, रामसरोवर अगरिया, सुखलाल अगरिया, राजकुमार अगरिया, सुकुल नागवंशी,लक्ष्मी अगरिया, सोहरी अगरिया, विजय अगरिया, सुखित लाल अगरिया,अर्जुन अगरिया, मिलन अगरिया,रामलखन अगरिया,प्रेमकुमार अगरिया,शिवशंकर अगरिया (गढ़वा झारखंड), माखन अगरिया, दुबराज अगरिया, पूरासाय अगरिया,बृजभान अगरिया, सहित कुल 12 जिलाध्यक्ष,36 नोडल एवं 38 अन्य मुख्यकर्ताओ का सम्मान एक मैडल एवं डायरी पेन से सम्मानित किया गया ll
राष्ट्रीय कोर सदस्य जो कार्यक्रम मे उपस्थित रहे दशरथ अगरिया मैनेजिंग डायरेक्टर, एवं सभी कोर डायरेक्टर मे रामखिलावन अगरिया, अन्नू अगरिया, विजय अगरिया, दादा दिलहरण अगरिया, श्री मति लक्ष्मी अगरिया, श्री मति सोहरी अगरिया ll
जिलाध्यक्ष मे मायाराम अगरिया, रामसरोवर अगरिया, विजय अगरिया, सुखलाल अगरिया, राजकुमार अगरिया, शिवशंकर अगरिया, सहित कई जिलाध्यक्ष मौजूद रहे ll
अन्य कार्यकर्ताओ मे बाबूलाल अगरिया, रामखेळावन अगरिया, रामसाजीवन अगरिया, मंगल अगरिया, गयादीन अगरिया, रामलल्लू अगरिया, सुदर्सन अगरिया, बुद्धवती अगरिया सहित कई जिलों से कई स्वजातीय बंधु, मातृ शक्तियां उपस्थित 1000-1200 की संख्या मे रहे ll
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  अगरिया मध्य भारत के वे आदिवासी समुदाय है जो लोहा गलाने यानि की लौह प्रगलक का कार्य करते है उनका मुख्य व्यवसाय लोहे से जुड़ा होता है अगरिया अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आते है। अगरिया समुदाय पत्थर से लोहा गलाते है लेकिन वर्तमान  में पत्थर पर सरकार द्वारा रोक लगाया गया  है जिससे उनका व्यवसाय काफी प्रभावित है। अतः अगर वर्तमान की बात करे तो अगरिया समुदाय इस समय अपने क्षेत्र में जिस ग्राम या परिवेश में रह रहे है वही के लोगो का उपयोग की सामग्री बनाकर उनको देते है तथा अपने किसानो का (जिनके ऊपर वे आश्रित है ) समबन्धी समस्तलोहे का कार्य करते है एवं अपने मेहनत का पैसा या खाद्यान्न लेकर अपने एवं अपने बच्चो का पालन पोषण कर रहे है। अगरिया समुदाय की पहचान अभी भी कई जगह में एक समस्या है है कई जगह उनको गोंड भी कह दिया जाता है ,लेकिन ऐसा कहना किस हद तक सही है पर  ,हां अगरिया को गोंडो का लोहार जरूर कहा जाता है लेकिन वास्तव में में अगरिया गोंड नहीं है बल्कि  गोंडो की उपजाति है। अगरिया मध्य भारत के लोहा पिघलाने वाले और लोहारी करने वाले लोग है जो अधिकतर मैकाल पहाड़ी क्षेत...