लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का प्रमुख कार्यक्रम अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम जो फाउंडेशन से जुड़े लगभग सभी राज्यों के जिलों मे प्रति वर्ष माह मार्च - अप्रैल मे संपन्न होता है ll जहाँ लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की ओर से प्रत्येक जिले के नोडल कार्यकर्ता अधिकारी नियुक्त किये जाते है जो जिलों मे उपस्थित होकर कार्यक्रम को सम्पन्न कराते है ll नियुक्त नोडल द्वारा फाउंडेशन के एजेंडा को विश्लेषण करते हुए उपस्थित सामाजिक स्वजातीय बंधुओ को विधिवत समझाया जाता है और कार्यक्रम के अंत मे उपस्थित स्वजातीय बंधुओ को शपथ ग्रहण करवाया जाता है ll अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का उद्देश्य अगरिया जनजाति जो की आज के इस आधुनिक परिवेश मे भी शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी, सामाजिक रहन सहन मे पिछड़ी जनजाति है जिसके स्तर मे सामाजिक जागरूकता के लिए इस कार्यक्रम को आयोजित कराया जाता है जिससे इस समाज मे जागरूकता आ सके और समाज सशक्त हो सके ll ज़िला सीधी के ग्राम सोनगढ़ मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 31/03/2025 को हुआ ll जहाँ ज़िला सीधी के लिए नियुक्त नोडल...
समाज सेवा के मूल मंत्र वे सिद्धांत या मार्गदर्शक विचार होते हैं, जो निःस्वार्थ भाव से समाज की भलाई के लिए कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। समाज सेवा के कुछ प्रमुख मूल मंत्र इस प्रकार हैं:
1. निःस्वार्थ सेवा – सेवा का उद्देश्य स्वार्थ या लाभ नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई होनी चाहिए।
2. समानता और समरसता – जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी की सेवा करना।
3. करुणा और संवेदनशीलता – जरूरतमंदों की पीड़ा को समझना और उनके कल्याण के लिए कार्य करना।
4. परस्पर सहयोग – समाज में एक-दूसरे का सहयोग करना और सामूहिक विकास के लिए काम करना।
5. स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण – समाज और प्रकृति की स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण की रक्षा करना।
6. शिक्षा और जागरूकता – समाज को शिक्षित और जागरूक बनाना ताकि वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ सकें।
7. ईमानदारी और पारदर्शिता – समाज सेवा में पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखना।
8. स्वयं का परिश्रम और त्याग – सेवा के लिए खुद आगे बढ़कर मेहनत करना और अपने सुख-सुविधाओं का त्याग करने की भावना रखना।
9. नैतिकता और सद्भावना – नैतिक मूल्यों को अपनाना और सद्भावना से समाज के हर व्यक्ति से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना।
10. दीर्घकालिक सोच – तात्कालिक सहायता के साथ-साथ समाज के स्थायी विकास और आत्मनिर्भरता के लिए काम करना।
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